देश-विदेश
राहत व बचाव कार्यों में सरकार की मदद करेगी सेना, indian army help UDMA in relief and rescue poeration
देहरादून- उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत व बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी, त्वरित तथा समन्वित बनाने के उद्देश्य से बुधवार को उत्तराखंड सब एरिया में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मानसून अवधि सहित विभिन्न आपदा की परिस्थितियों में संयुक्त रूप से बेहतर कार्ययोजना तैयार करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना सदैव एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में जब भी किसी बड़ी आपदा की स्थिति उत्पन्न हुई है, सेना ने अत्यंत संवेदनशीलता, तत्परता एवं पेशेवर दक्षता के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्ष 2024 में केदारघाटी में आई आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सेना एवं वायु सेना ने हजारों तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। इसी प्रकार वर्ष 2025 में धराली सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी सेना ने राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों, मशीनरी एवं संसाधनों को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी में सराहनीय कार्य किया। इस अवसर पर उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय भारतीय सेना का सर्वोच्च उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना होता है। उन्होंने कहा कि सेना उत्तराखण्ड में किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सदैव तैयार रहती है तथा यूएसडीएमए के साथ समन्वय को लगातार और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। इस अवसर पर यूएसडीएमए के एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। क्यूआरटी में सेना की सहभागिता पर चर्चा बैठक के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने सेना से अनुरोध किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोगी उपकरणों, मशीनरी एवं संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर अपलोड किया जाए तो आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न एजेंसियां इन संसाधनों का शीघ्र एवं प्रभावी उपयोग कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त विभिन्न जनपदों में गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की सहभागिता तथा पूर्व सैनिकों के अनुभव एवं विशेषज्ञता का उपयोग राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई। फोटो परिचय: आपदा प्रबंधन विभाग और भारतीय सेना के अधिकारियों के बीच हुई समन्वय बैठक।
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