देवभूमि बन रहा है कॉरपोरेट घरानों का नया ठिकाना: कांग्रेस/Devbhoomi’ becoming a new hub for corporate houses: Congress

उत्तराखंड कांग्रेस की पीसी

-कांग्रेस चार्जशीट कमेटी ने  लगाए गंभीर आरोप, कहा सख्त भू कानून को किया जा रहा है बाईपास

देहरादून: प्रदेश कांग्रेस चार्जशीट कमेटी ने धामी सरकार पर अरबों की बेशकीमती जमीन चुनिंदा औद्योगिक घरानों को लगभग फ्री में सौंपने का आरोप लगाया है। दावा किया है कि उद्योग धंधों की स्थापना के नाम पर मौजूदा प्रावधानों में संशोधन किया गया है और यहां तक कि लीज पर जमीन हासिल करने वाले कॉरपोरेट घरानों को इसे सबलीज पर देने की भी छूट दी गयी है।

शनिवार को राजधानी के एक होटल में कांग्रेस चार्जशीट कमेटी ने एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष  गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य आदि मौजूद रहे। पत्रकार वार्ता की शुरुआत करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पूरे कार्यकाल में प्रदेशभर की बेशकीमती भूमि को खुर्दबुर्द कर केवल भूमाफिया की सरकार होने का प्रमाण दिया है। उन्होंने प्रदेश की सरकारी भूमि को अपने चहेतों को कौड़ियों के भाव बेचा जा रहा है। इसका विस्तृत ब्यौरा देते हुए करन माहरा ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रापर्टी डीलर की तरह काम कर रहे हैं। करन माहरा ने कहा कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) राज्य में अवस्थापना विकास और निवेश परियोजनाओं के नियोजन व क्रियान्वयन का प्रमुख निकाय है। मुख्यमंत्री स्वयं इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। सरकार के निर्देश पर यूआईआईडीबी ने उद्यान विभाग, पोटैटो प्रोजेक्ट, ब्रीडिंग गार्डन और अन्य विभागों की लगभग 7,000 बीघा खाली या कम-उपयोग वाली सरकारी भूमि को चिन्हित कर एक लैंड बैंक तैयार किया गया है। इसे निजी निवेशकों को सौंपने के लिए तय किए गए प्रावधानों में ढील दी गई है। बेशकीमती सरकारी जमीनों को 90 वर्ष तक की दीर्घकालीन लीज पर देने का प्रावधान, जो सामान्य वाणिज्यिक लीज (आमतौर पर 30 वर्ष) से कहीं अधिक है। लीज पर ली गई भूमि को आगे सब-लीज पर देने की अनुमति और इसे बंधक रखकर बैंकों से भारी ऋण लेने की भी खुली छूट दी गई है। इसके अतिरिक्त और कई प्रकार की वित्तीय छूट दी गई है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन जमीनों का उपयोग पूर्णतः व्यावसायिक (होटल, रिसॉर्ट, टाउनशिप) उद्देश्यों के लिए होना है, लेकिन सरकार निजी कंपनियों से लीज रेंट का निर्धारण कृषि भूमि के सर्किल रेट पर करने जा रही है। वाणिज्यिक और कृषि दरों के इस भारी अंतर के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगने और कंपनियों को औने-पौने दामों पर जमीन मिलनी तय है।

औद्योगिक घरानों के लिए है यूआईआईडीबी : आर्य

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने स्थानीय लोगों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने यूआइआईडीबी के गठन पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि इसका गठन प्रदेश की बेशकीमती जमीनों को कॉरपोरेट घरानों के हाथों कौड़ियों के भाव बेचने का षड्यंत्र किया गया है। उन्होंने जार्ज एवरेस्ट की जमीन का मामला भी उठाया। पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि एक ही कम्पनी नाम बदलकर सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग कर रही है। शासन स्तर पर इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रदेश की जनता से सच छिपाया जा रहा है।

कांग्रेस के आरोपों को शासन ने किया खारिज

मीनाक्षी सुंदरम की फाइल फोटो

देहरादून, संवाददाता: यूआईआईडीबी के माध्यम से देश के चुनिंदा औद्योगिक घरानों को औने-पौने दामों में सात हजार बीघा जमीन हस्तांतरण करने संबंधी दावे को शासन ने खारिज कर दिया है।

प्रमुख सचिव नियोजन और यूआईआईडीबी के एमडी आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि सर्विस सेक्टर मसलन पर्यटन, उच्च शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए यूआईआईडीबी का गठन किया गया है। अभी तक यूआईआईडीबी को सिर्फ 45 एकड़ जमीन मिली है। ऐसे में यह कहना हि हमने सात हजार बीघा जमीन औद्योगिक घरानों को दिया है सरासर गलत है। उन्होंने बताया कि इतना जरूर है कि पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया को थोड़ा सरल बनाया गया है। अभी तक सिर्फ 18 एकड़ जमीन का ही हस्तांतरण हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *