प्रदेश पुलिस का दावा, संबंधित सिपाही का आपराधिक इतिहास, पहले से चल रहा है निलंबित
देहरादून: दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बीच इस्तीफा देकर उत्तराखंड पुलिस के एक जवान ने दिल्ली से देहरादून तक हड़कंप मचा दिया है। सिपाही के इस अप्रत्याशित कदम से उत्तराखंड पुलिस बैकफुट पर है और दावा किया है कि उसका आपराधिक इतिहास है और वह पहले से निलंबित चल रहा है। आरोपी सिपाही आईजी गढ़वाल का गनर भी रह चुका है।
शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर उस समय हड़कंप मच गया जब उत्तराखंड पुलिस का एक जवान वर्दी में वहां पहुंचा और छात्रों के समर्थन व सरकार के विरोध में बयानबाजी की। इतना ही नहीं मंच से ही उसने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देने की घोषणा भी कर दी। मूल रूप से हरिद्वार निवासी और अंतिम कार्यकाल में पिथौरागढ़ जनपद में तैनात शेर सिंह नाम के इस कांस्टेबल के अचानक इस्तीफा देने की बात सामने आने पर उत्तराखंड पुलिस ने आनन-फानन में उसकी कुंडल खंगाली और उसे कई मामलों का आरोपी करार दिया। उत्तराखंड पुलिस के अनुसार शेर सिंह वर्ष 2025 से एक गंभीर आपराधिक प्रकरण में नामजद है और पुलिस से निलंबित चल रहा है। उसके विरुद्ध थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में मु०अ०सं० 415/2025 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(2)(बी), 351(2) एवं 352 के तहत मुकदमा पंजीकृत है। पुलिस ने दावा किया है कि हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि द्वारा संचालित आपराधिक गिरोह में शेर सिंह की भी सक्रिय भूमिका पाई जा चुकी है। आरोप है कि सिपाही पद पर रहते हुए शेर सिंह ने कुछ अपराधियों के साथ मिलकर उनके पक्ष में स्थानीय लोगों को डराकर उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करने तथा उससे आर्थिक लाभ अर्जित करने में सहयोग किया। जांच के अनुसार, रुड़की निवासी एक विधवा महिला एवं उसके परिवार को गैंग द्वारा लगातार धमकाया गया। उसकी जमीन बेच दी गई।
15 सितम्बर 25 को हुई थी गिरफ्तारी

जांच के आधार पर पुलिस ने यह भी दावा किया है कि उस समय उत्तराखंड पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात शेर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपराधी प्रवीण वाल्मीकि से सितारगंज जेल तथा रुड़की न्यायालय में कई बार मुलाकात की। पीड़िता और उसके परिवार को मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाने का प्रयास किया। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के उपरांत शेर सिंह को दिनांक 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में उसे 7 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय, नैनीताल से जमानत प्राप्त हुई। गिरफ्तारी के उपरांत विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
..तो चार दिन पहले हुआ है निलंबन
सिपाही शेर सिंह को लेकर पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि 15 सितम्बर 2025 में गिरफ्तारी के बाद ही उसे निलंबित कर दिया गया और तभी से वह निलंबित चल रहा है। उधर, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती का कहना है कि 28 जून 2026 को वह बिना अवकाश स्वीकृत कराये ड्यूटी से गैरहाजिर हो गया। इस संबंध में एसएसपी पिथौरागढ़ ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस का जवाब नहीं देने पर 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया। यानी 24 को जंतर मंतर पर पहुंचने से चार दिन पहले उसे निलंबित किया गया है। दूसरी तरफ शासन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि 15 सितम्बर 2025 को गिरफ्तार होने के बाद ही निलंबित कर दिया गया था। आईजी कुमाऊं का यह भी कहना है कि दिल्ली प्रकरण में उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी।