उत्तराखंड में 452 में से 179 मदरसे बंद, 19 सील/ 179 Madersa closed and 19 sealed in uttarakhand till date

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-35 शिक्षण संस्थानों को प्राधिकरण और 30 को शिक्षा विभाग ने दी मान्यता

देहरादून, संवाददाता: उत्तराखंड में मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शासन को पत्र लिखा है और प्रदेश में संचालित मदरसों की जानकारी दी है।

प्राधिकरण की ओर से विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण पराग मधुकर धकाते को दी गई जानकारी में उल्लेख हुआ है कि प्रदेश में 452 मदरसे संचालित है। इनमें से 30 मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता हासिल है। 134 मदरसे ऐसे हैं जिनके संचालकों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया है । 54 मदरसा संचालकों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। प्रदेश भर में कुल 179 मदरसे बंद हैं। 19 मदरसों को मान्यता नहीं होने के कारण शासन ने सील कर दिया है, जबकि 33 मदरसे एवं दो अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण देहरादून द्वारा मान्यता दी गई है। प्राधिकरण द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार देहरादून में 41 मदरसे संचालित हैं। तीन ने शिक्षा विभाग से मान्यता ली है, आठ मदरसा संचालकों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है। 11 मदरसा संचालकों ने शिक्षा विभाग में आवेदन नहीं किया है। 12 मदरसे बंद हैं। एक मदरसे को सील किया गया है , जबकि सात को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा मान्यता दी गई है। हरिद्वार में सर्वाधिक 270 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 21 को शिक्षा विभाग ने मान्यता दी है। 76 मदरसा संचालकों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है। 43 मदरसों ने शिक्षा विभाग में आवेदन नहीं किया है। 102 मदरसे बंद हैं, जबकि चार को सील किया गया है। 24 मदरसे एवं दो अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने मान्यता दी है। उधमसिंह नगर में 119 मदरसे संचालित हैं। इनमें से चार को शिक्षा विभाग से मान्यता मिली है। 48 मदरसा संचालकों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है। 55 मदरसे बंद हैं और 10 को सील किया गया है। दो मदरसों को प्राधिकरण ने मान्यता दी है। इसी तरह नैनीताल जिले में 18 मदरसे संचालित हैं। दो ने शिक्षा विभाग से मान्यता ली है। दो मदरसा संचालकों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। 10 मदरसे बंद हैं। चार को सील किया गया है। इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा में एक, चंपावत में दो और पिथौरागढ़ में एक मदरसा संचालित हैं। इनमें से किसी ने भी मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। इनके खिलाफ अभी कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है।

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