तेलंगाना की तर्ज पर जमीन का अधिग्रहण करेगी सरकार/uttarakhand government will acquire land in Telangana style

-शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए टाउन प्लानिंग स्कीम और लैंड पूलिंग स्कीम 2025 को कैबिनेट ने दी मंजूरी

-ग्रेडर देहरादून का आइडिया फ्लॉप होने के बाद सरकार ने ली सबक, अब व्यवस्थित रूप से बनेगा लैंड बैंक

देहरादून।

उत्तराखंड सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टाउन प्लानिंग स्कीम पर होम वर्क शुरू कर दिया गया है। इसके लिए तेलंगाना की तर्ज पर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा ताकि सभी आय वर्ग के लोगों को एकीकृत रोड कनेक्टिविटी के साथ आवासीय योजना का लाभ मिल सके।

बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में नियोजन विभाग के दो प्रस्तावों टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली 2025 तथा लैंड पूलिंग नियमावली 2025 को मंजूरी दी गई है। इसके बारे में सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि  टाउन प्लानिंग स्कीम को धरातल पर उतारने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी का गठन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव अथवा चीफ एडमिनिस्ट्रेटर (यूएचयूडीए) इसके सदस्य सचिव होंगे और जिलाधिकारी तथा चीफ टाउन प्लानर समेत 12 अधिकारी इसके सदस्य होंगे। किसी भी जिले में टाउन प्लानर द्वारा प्रस्तावित टाउनशिप के प्रस्ताव को यही हाई पावर कमेटी मंजूरी देगी। संबंधित प्रस्ताव में संशोधन या उसे रद करने का अधिकार हाई पावर कमेटी को होगा।यदि टाउनशिप को लेकर कोई विवाद की स्थिति पैदा होती है तो यूएचयूडीए के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर पहले अपील अधिकारी होंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ऑफिसर फाइनल अधिकारी होंगे। टाउनशिप के लिए यह जरूरी होगा कि संबंधित क्षेत्र के सभी भू स्वामी लिखित रूप में अपनी सहमति दे। टाउनशिप को लेकर लैंड पूलिंग स्कीम नियमावली का भी प्रावधान किया गया है। सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि पिछले समय में ग्रेटर देहरादून की परिकल्पना की गई थी और इसके लिए शहर के आसपास की जमीन को अधिग्रहित किया गया था। लेकिन बासमती बचाओ अभियान के तहत इस योजना का विरोध हुआ और ग्रेटर देहरादून का आईडिया परवान नहीं चढ़ पाया। नतीजा यह निकला कि बासमती बेल्ट भी नहीं बचा और संबंधित क्षेत्र में अनियोजित कंस्ट्रक्शन भी खड़े हो गए। पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए लैंड पूलिंग स्कीम का प्रावधान किया गया है। इसके तहत कोई भी भू स्वामी अपनी स्वेच्छा से जमीन सरकार को दे सकती है। यदि कोई भू स्वामी ऐसा करता है तो उसके द्वारा दी जाने वाली जमीन के अनुपात में व्यावसायिक या रिहायशी जमीन उपलब्ध करायी जाएगी। इसके लिए नियमावली में सभी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। सचिव नियोजन ने बताया कि तेलंगाना की राजधानी बनाने के लिए यह स्कीम शुरू की गयी थी। इसका परिणाम यह निकला कि सरकार को जितनी जमीन चाहिए थी उससे कहीं अधिक जमीन उसे मिल गई। इस तरह लैंड बैंक में इजाफा हुआ और भू स्वामियों को भी इसका लाभ मिला।

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