केदारनाथ धाम में कपाट बंद होने के बाद पसरा सन्नाटा, ITBP व पुलिस ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

भैया दूज पर्व पर बाबा केदार के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं. जिसके बाद केदारपुरी में सन्नाटा पसरा हुआ है. पैदल पड़ाव पर ढाबा, होटल, रेस्टोरेंट चलाने वाले सभी व्यापारी अपने घरों को निकल गए हैं. गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल मार्ग पर सन्नाटा पसरा हुआ है. हालांकि कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ धाम में चल रहे द्वितीय चरण के पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं. इसके अलावा केदारनाथ धाम की सुरक्षा के लिए पुलिस और आईटीबीपी के जवानों को तैनात किया गया है.

गौर हो कि केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिये बंद हो चुके हैं. जिसके बाद केदारनाथ धाम में सन्नाटा पसरा है. कपाट बंद होने के बाद पुलिस और आईटीबीपी के जवानों को धाम की सुरक्षा सौंपी गई है. जबकि लगातार एक सप्ताह से पैदल यात्रा मार्ग समेत धाम में सफाई अभियान चलाया जा रहा है. अभी फिलहाल धाम में मौसम साफ है. बर्फबारी होने पर भी धाम में सुरक्षा जवान मौजूद रहेंगे. यात्रा सीजन के दौरान धाम समेत पैदल मार्ग और आसपास के बुग्यालों में फैली गंदगी को इन दिनों साफ किया जा रहा है.

एक सप्ताह तक लगातार सफाई अभियान यहां चलाया जा रहा है. प्लास्टिक समेत अन्य कूड़े को एकत्रित कर नीचे भेजा जाएगा. फिलहाल केदारनाथ धाम में द्वितीय चरण के पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं और यह कार्य मौसम साफ रहने तक जारी रहेंगे. अत्यधिक बर्फबारी होने के बाद यह कार्य बंद किये जाएंगे. मास्टर प्लान के तहत केदारनाथ धाम में कई प्रकार के पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं.

केदारनाथ धाम समेत पैदल यात्रा मार्ग पर लगाये गये सीसीटीवी कैमरों के जरिये भी निगरानी की जा रही है. जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम के जरिये यात्रा मार्ग और धाम की हरेक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. कपाट बंद होने के बाद मजदूरों के अलावा कुछ साधु-संत अभी भी केदारपुरी में मौजूद हैं. वहीं कपाट बंद होने के बाद केदारनाथ व पैदल पड़ाव में वीरानी छाई हुई है.

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने कहा कि केदारनाथ धाम और यात्रा मार्ग की हरेक गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरों के जरिये नजर रखी जा रही है. जबकि मंदिर की सुरक्षा के लिये आईटीबीपी व पुलिस के जवान तैनात किये गये हैं. उन्होंने बताया कि इन दिनों धाम और यात्रा मार्ग पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है. वहीं भगवान केदारनाथ की डोली आज अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी.

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