
-प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने और राजस्व बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट ने दी मंजूरी
-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 11 प्रस्ताव हुए पास
देहरादून, 24 दिसम्बर
- धामी मंत्रिमंडल ने नैचुरल गैस (सीएनजी-पीएनजी) पर लगने वाले वैट को 20 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। इससे जहां प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा वहीं दूसरे राज्यों में गैस खरीदने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी और इससे भविष्य में सरकार का राजस्व बढ़ेगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में 11 एजेंडे पास किये गये। अधिकांश फैसले कर्मचारियों के हित से जुड़े हैं। इसकी जानकारी देते हुए महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में एक अहम फैसला नैचुरल गैस पर वैट की दर में कमी करने का भी रहा। कैबिनेट के फैसले के तहत प्रदेश में अब सीएनजी और पीएनजी पर 20 प्रतिशत के बदले पांच प्रतिशत वैट लगेगा। हालांकि फरवरी माह में हुई कैबिनेट बैठक में भी इस तरह का फैसला लिया गया था। इसमें पीएनजी पर वैट की दर को घटाकर 20 से पांच प्रतिशत और सीएनजी पर वैट की दर को बीस प्रतिशत से घटाकर दस प्रतिशत किया गया था। मार्च में सचिव वित्त दिलीप जावलकर ने इसका आदेश भी जारी किया गया था। बुधवार को हुई कैबिनेट में सभी प्रकार की नैचुरल गैस पर वैट की दर को पांच प्रतिशत कर दिया गया है। राज्य सरकार का तर्क है कि पड़ोसी राज्य हिमाचल और उत्तर प्रदेश में वैट पांच और चार प्रतिशत है। इस कारण उत्तराखंड के गैस आधारित वाहनों के चालक अपने वाहनों में गैस भरवाने के लिए सीमावर्ती राज्यों का रुख करते थे। इससे सरकार को राजस्व नुकसान होता था। वैट की दर में कमी का दूसरा कारण पर्यावरण संवर्धन है। इससे औद्योगिक इकाइयों में भी गैस आधारित टरबाइन की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि प्रारंभिक समय में वैट की दर में कमी आने के कारण 38 से चालीस करोड़ का वार्षिक नुकसान होगा। लेकिन भविष्य में गैस की खरीद बढ़ने से इस नुकसान की भरपाई हो जाएगी।
सेब उत्पादकों को राहत
धराली क्षेत्र में मानसून सीजन में आई आपदा के कारण सेब उत्पादकों को काफी नुकसान हुआ था। राहत व बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने सेब उत्पादकों को राहत दिलाने की घोषणा की थी। इसी घोषणा के तहत बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में धराली क्षेत्र के किसानों से रॉयल डिलीशियस सेब 51 रुपये प्रति किलो और रेड डिलीशियस सेब 45 प्रतिशत प्रति किलो की दर से खरीदने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी। तय किया गया है कि उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा किसानों से सेब खरीदे जाएंगे।
उद्योगों का ग्राउंड कवरेज बढ़ेगा
कैबिनेट ने उत्तराखण्ड सामान्य औद्योगिक विकास नियंत्रण (संशोधन) विनियमावली, 2025 को मंजूरी दी है। दरअसल कंप्लायंस बर्डन को कम करने, व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने तथा इसे और अधिक स्पष्ट करने के लिए औद्योगिक भूखंडों के सम्बन्ध में आवश्यक संशोधन विलोपन और परिवर्द्धन के उद्देश्य से उत्तराखंड सामान्य औद्योगिक विकास नियंत्रण (संशोधन) विनियम-2022 और 2024 को संशोधित किया गया है। इसके अंतर्गत एम.एस.एम.ई यूनिट और इंडस्ट्री यूनिटों के ग्राउंड कवरेज को बढ़ाया गया है।
बांस-रेशा परिषद में 13 पद सृजित
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के संगठनात्मक ढांचे के पुनर्गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की परियोजना एक निश्चित समयावधि के अन्तर्गत क्रियान्वित की जानी होती है। इसमें बदलती परिस्थितियों में विशेषज्ञता की भी आवश्यकता होती है तथा इसके ढांचे में व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रकृति के पद के 13 स्थाई पद पूर्व से सृजित हैं। जिन्हें खुले बाजार या आउटसोर्स पर रखे जाने की आवश्यकता को देखते हुए 13 पदों का संशोधित ढांचा स्वीकृत किया गया है।
उपनल पर कैबिनेट सब कमेटी गठित
समान कार्य और समान वेतन संबंधी उपनल कर्मचारियों की समस्याओं का फौरी हल नहीं निकल पाया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में इस विषय पर फैसला लेने के लिए यह मामला कैबिनेट सब कमेटी को सौंपा गया है। इस कमेटी के गठन के लिए कैबिनेट ने मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।