उत्तराखंड में कृषि भूमि पर रिसोर्ट बनाना हुआ आसान/in Uttarakhand one can make resort on agriculture land

उत्तराखंड में कृषि भूमि पर रिसोर्ट बनाना हुआ आसाý

-लैंड यूज परिवर्तन की बाध्यता खत्म, हाउसिंग विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने दी मंजूरी

-सीएम धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 19 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

-ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा देने के लिए फएआर में संशोधन , पांच से दो प्रतिशत तक की छूट

-अब विश्वविद्यालय स्तर पर ही होगी राज्य के टेक्निकल कॉलेजों में प्रवक्ताओं की नियुक्ति

-नियोजन से जुड़े उत्तराखंड जन विश्वास अध्यादेश 2025 के तहत कारावास से मिली मुक्ति

-विद्युत टावरों के निर्माण और बिजली लाइन बिछाने के लिए मुआवजे की राशि में बढ़ोत्तरी

देहरादून।

उत्तराखंड में अब कृषि जमीन पर रिसार्ट बनाना आसान हो गया है। सख्त भू कानून की मंशा को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार ने इसके लिए मौजूदा प्रावधानों को शिथिल करते हुए इसके लिए आवश्यक लैंड यूज परिवर्तन की बाध्यता को खत्म कर दिया है।

बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में कैबिनेट की बैठक हुई। सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने बताया कि कैबिनेट में कुल 19 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इसमें प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, ग्रीन बिल्डिंग को प्रोत्साहित करने, राज्य में शहरीकरण के बढ़ते चलन को देखते हुए नियोजित विकास को गति देने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। सचिव सीएम ने बताया कि इको रिसोर्ट की तर्ज पर अब यदि कोई प्रदेश में कृषि भूमि पर रिसार्ट बनाना चाहता है तो उसे भू परिवर्तन की बाध्यता से मुक्ति दे दी गई है। पर्यटन के विकास के मद्देनजर यह महत्पूर्ण निर्णय लिया गया है। इतना ही नहीं रिसार्ट निर्माण के लिए पहुंच मार्ग के मानकों को भी बदला गया है। अब पर्वतीय क्षेत्र में नौ मीटर चौड़ाई के बदले छह मीटर और मैदानी क्षेत्र में 12 मीटर चौड़ाई को बदलकर नौ मीटर कर दिया गया है। इसी तरह  शहरीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति और इससे सामंजस्य स्थापित करने के लिए उत्तराखंड टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली 2025 और उत्तराखंड लैंड पूलिंग नियमावली 2025 को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इसके माध्यम से कई भी भूस्वामी अपनी मर्जी से इस स्कीम में शामिल हो सकता है। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत यदि कोई अपनी जमीन सरकार को देता है तो उसे उसी अनुपात में व्यावसायिक अथवा आवासीय जमीन उपलब्ध करायी जाएगी। इसी तरह स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट फार कैपिटल इन्वेस्टमेंट के तहत केंद्र से मिले दिशा निर्देशों के क्रम में ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। यदि कोई ग्रीन बिल्डिंग बनाता है तो प्लैटिनम श्रेणी में एफएआर (फ्लोर-एरिया रेशियो) में पांच प्रतिशत, गोल्ड श्रेणी में तीन प्रतिशत और सिल्वर श्रेणी में दो प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य लोक सेवा आयोग से टेक्निकल कॉलेज में प्रवक्ताओं की नियुक्ति का अधिकार वापस ले लिया है। यह नियुक्ति अब विश्वविद्यालय के स्तर पर होगी। हालांकि सरकार ने दावा किया है कि इससे समानता के अवसर और गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके साथ ही कैबिनेट ने माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना भी शुरू की है। इसमें प्रतिभाशाली छात्रों को क्लैट, जेईई, नीट, यूपीएससी, यूकेपीएसएसी, यूकेएसएससी, सीडीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए सक्षम कोचिंग संस्थान का चयन किया जाएगा। भारत सुरक्षा संहिता के तहत प्रदेश में राज्य स्तर पर अभियोजन निदेशालय और जिला स्तर पर उप निदेशालय के गठन के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूर कर लिया है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *