धराली आपदा: कर्नल कोठियाल के बयान पर गरमाई सियासत

 

देहरादून। पांच अगस्त को उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई आपदा में मृतकों की संख्या और रेस्क्यू टीम द्वारा चलाए गये राहत व बचाव कार्यों पर कर्नल अजय कोठियाल ने सवाल खड़े किये हैं। इस बयान को गंभीरता से लेते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार पर आपदा पीड़ितों के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया है और तथ्यों की गहराई से छानबीन करने के लिए अपने चार सदस्यीय टीम को धराली भेजने का निर्णय लिया है।

भाजपा नेता और मौजूदा समय में पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष  कोठियाल नेहरू इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग के प्रधानाचार्य रह चुके हैं। केदारनाथ त्रासदी के दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्र में राहत व बचाव कार्य की जिम्मेदारी भी संभाली थी। धराली आपदा के बाद भी सीएम धामी ने उन्हें राहत व बचाव अभियान के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया था। उच्च हिमालयी क्षेत्रों का गहरा अनुभव रखने और सरकार में दायित्वधारी होने के कारण उनके बयानों को हलके में नहीं लिया जा सकता। यही कारण है कि कांग्रेस को बैठे बिठाए एक मुद्दा हाथ लग गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कर्नल कोठियाल के बयान ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े अधूरे और भ्रामक हैं। धराली में राहत और पुनर्वास कार्यों में भारी लापरवाही बरती गई है। गोदियाल ने कहा कि इसी  संदर्भ में पार्टी ने निर्णय लिया है कि उत्तराखंड कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जिसमें वह स्वयं शामिल रहेंगे, 4 दिसंबर को उत्तरकाशी के धराली आपदाग्रस्त क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेगा। प्रतिनिधिमंडल स्थानीय पीड़ित परिवारों से मिलकर वास्तविक स्थिति की जानकारी लेगा और प्रशासनिक स्तर पर हो रही अनदेखी का प्रत्यक्ष आकलन करेगा। धराली से लौटकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उस रिपोर्ट  को इस उम्मीद के साथ राज्यपाल को सौंपा जाएगा की राज्यपाल महोदय और केंद्र सरकार उत्तराखंड की सरकार पर दबाव बनाएं। ताकि स्थानीय लोगों की अपेक्षा अनुरूप रेस्क्यू ऑपरेशन चले । गोदियाल ने कहा कि “जब मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि ही धराली की स्थिति पर सरकार की पोल खोल रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि सरकार ने जनता से जानकारी छुपाई है।”

 

 

कोठियाल की सलाह को गंभीरता से लेगी सरकार: भाजपा

 

-पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा, तथ्यों के पूर्ण निष्कर्ष से पहले  राजनीतिक बयानबाजी से बचें विपक्ष

देहरादून, 2 दिसम्बर (नवोदय टाइम्स) भाजपा ने दायित्वधारी कर्नल कोठियाल को लेकर वायरल जानकारी पर स्पष्ट किया कि सरकार ने सभी संभव उपायों से धराली में राहत बचाव कार्य संपन्न किए हैं। फिर भी हमारे एक वरिष्ठ और रेस्क्यू में अनुभवी कार्यकर्ता के तथ्यों को पार्टी गंभीरता से लेगी और सरकार भी यथोचित कार्रवाई करेगी। वहीं विपक्ष से भी आग्रह किया, तथ्यों के पूर्णतया निष्कर्ष से पूर्व किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।

पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि कर्नल कोठियाल ने धराली आपदा को लेकर जो भी तथ्य कहे हैं उस पर पार्टी गंभीरता से विमर्श करेगी तथा जरूरत के अनुसार सरकार उस पर निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि आंकड़े जुटाने के जो माध्यम हैं, उसमें राहत कार्यों में लगे लोगों को प्राप्त डेड बॉडी होती है। आंकड़े उनके परिजन देते हैं जो घटनास्थल से मिसिंग हैं। इस तरीके से एनडीआरएफ ने एसडीआरएफ के कार्यों से भी सूचना आती है। वहां पर तमाम व्यापारिक क्षेत्र में मौजूद के माध्यम से भी मिसिंग जानकारी बड़ा आधार बनती है। निश्चित तौर पर इस दुर्घटना में भी सब तरह की जानकारी जिला प्रशासन के पास होगी और उसके आधार पर ही एक अंतिम जानकारी सामने आई होगी। उन्होंने कहा कि कर्नल कोठियाल एक फौजी हैं, लिहाजा एक सैनिक की भांति उन्हें जो दिखा या लगा, उन्होंने उसे सीधा सीधा कह दिया। चूंकि बहुत प्रशासनिक एवं व्यवहारिक तथ्य भी थे, जिनका जिक्र उन्होंने तत्काल नही किया। लिहाजा उनका यह पूरा बयान एकतरफा सा प्रस्तुत हो गया है। लेकिन हम एक राजनीतिक दल है और हम एक एक कार्यकर्ता के प्रति गंभीर है। निश्चित तौर पर उनसे बात की जाएगी कि किस आधार पर उनके द्वारा आपदा से जुड़े तथ्यों को प्रस्तुत किया गया।

 

 

 

67 नहीं 147 लोगों मलबे में दबे: कोठियाल

भाजपा और कांग्रेस की बयानबाजी के बीच सवाल यह है कि कर्नल अजय कोठियाल ने कहा क्या? दरअसल, हाल ही में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में विश्व आपदा पर एक सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में कर्नल कोठियाल ने भी एक विशेषज्ञ के तौर पर अपने विचार रखे। उन्होंने तथ्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण के साथ ही उसके व्यावहारिक पक्षों पर भी ध्यान देने की वकालत की। मिसाल के तौर पर कर्नल कोठियाल ने धराली आपदा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अचानक आई आपदा में मलबे में दबे लोगों का सरकारी आंकड़ा 67 के करीब है। यह सच नहीं है। क्योंकि वहां कम से कम 147 लोग मिसिंग हैं। वे सभी मलबे में दबे हुए हैं। कोठियाल ने रेस्क्यू ऑपरेशन और आपदा की परिस्थितियों की हुई जांच पर भी सवाल उठाए । उन्होंने कहा कि बचाव व राहत की स्थिति यह है कि वहां आज तक कंस्ट्रक्शन का काम शुरू नहीं हुआ। कर्नल ने कहा कि जहां तक जांच की बात है तो दो वैज्ञानिक वहां पहुंचे। उन्होंने ग्राउंड जीरो पर जाने की जहमत नहीं उठाई। नीम के दो इंस्ट्रक्टर को ऊपर भेज दिये। उन्होंने जो तस्वीर खींची उसके आधार पर वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह आदेश जारी हो जाएगा कि धराली रहने लायक नहीं है। उसे खाली किया जाए। कर्नल ने कहा कि वैज्ञानिकों ने हिमालयी आपदा को ब्लेम गेम बना दिया है। वह कहते हैं कि यह क्षेत्र अनस्टेबल है। यह बसने लायक नहीं है। कर्नल ने कहा कि अनस्टेबल तो चीन का हिमालयी क्षेत्र भी है। वह कैसे आगे बढ़ता जा रहा है। हमें इस विषय पर सोचना चाहिए। हम हिमालय के बाशिंदे हैं। हिमालय हम नहीं छोड़ सकते। हमारी जांच का फोकस इसी विषय पर होना चाहिए कि कैसे इस क्षेत्र को बसने के लायक बनाया जाए। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो हम पलायन को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि उचित तो यह होगा कि यूकॉस्ट और वाडिया के शोधार्थियों को मौके पर जाकर कैंप करना  चाहिए था और शोध करना चाहिए थे। उन्होंने कहा कि सरकार या वैज्ञानिक यह कैसे कह सकते हैं कि धराली छोड़ दो। हम कैसे छोड़ दें। वहां हमारे भगवान दबे हैं। हमारे बच्चों की डिग्रियां दबी पड़ी, शादियों के मंगलसूत्र दबे पड़े हैं। 147 लोग दबे हैं। कुल मिलाकर आपदा सम्मेलन के तीन दिन बाद कर्नल कोठियाल का यह वीडियो वायरल हुआ है जिसने सनसनी मचा दी है।

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